Hindi poetry : यादों की जलती लालटेने बुझा दें अब – Ranjan Kumar

lantern memories

चांद उफक में डूब चुका है,
आ जाओ 
यादों की जलती लालटेंने 
बुझा दे हम !

रातरानी का शुक्रिया कर 
सो जायें ,
यादों को सुबह तक ,
महमहाती रखेंगी ये …

नींद को
सिरहाने बुलाते हैं अब ,
यादों की कुनमुनाती पोटली 
पायताने रख देते हैं 

संभाल के ,
चाँद भी उफक में 
डूब चुका है ,
आ जाओ, यादों की जलती 
लालटेने बुझा दें अब !!

– रंजन कुमार

Share
Pin
Tweet
Share
Share