Hindi poetry: वो कौए कौए भी न रहे

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कुछ कौए 

हंस बनना चाहते थे ,

पर रंग कर अपने सफेद  ..


वक़्त की बारिश में 

धुल गए रँगे पंख ,

हंस तो बन न सके..


अब तो हालत ये कि 

वो कौए कौए भी न रहे !!

– रंजन कुमार