Hindi poetry : रक्त चूषक – Ranjan Kumar

rakt chusak

रक्त चूषक
अक्सर 
लिजलिजे होते हैं ,
सर्व सुलभ 
और सर्व ब्यापक भी !

यथा
जोंक ,चमोकन ,
खटमल , मच्छर ,
और कुछ इंसान भी …!

इनके आस पास
होने का
एहसास ही
अजीब लिजलिजेपन से
भर देता है मन को !

यह एहसास ही
जानलेवा है ,
ओ खुदा कहाँ हो तुम ,
निकालो मुझे यहाँ से
यहाँ सर्वत्र इन्हीं का बसेरा है !!

– रंजन कुमार

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