Hindi poetry : छोडो यार ये रोज रोज का ताना बाना – Ranjan Kumar

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Truth and A Lie

तुझे नंगा सच पसंद नहीं ,
और मुझे …

रेशमी जुमलों में लिपटा झूठ !
छोड़ो यार.. 

ये रोज रोज का ताना बाना ,
इस दोस्ती की बुनियाद
बहुत जर्जर है ,

अब विपरीत दिशा में
अपनी मंजिलें तलाशते हैं ,

साझे का महल
सुकून नहीं दे सकता !!

– रंजन कुमार