Hindi poetry on death : एक सन्नाटा है मौत, बस जोरदार सन्नाटा – Ranjan Kumar

मौत दर्द नहीं है 
कोई पीड़ा भी नहीं है ,


एक सन्नाटा है मौत 
बस जोरदार सन्नाटा ..


जो धीरे से उतरता है 
और पसर जाता है !


इस सन्नाटे को
जो चीरती हैं चीखें ,


वह मृतक के लिए नहीं,


जो जिन्दा रह गए हैं
वो खुद के लिए चीखते हैं !


जो गया वह अब उनके लिए
क्या नहीं करेगा..


चीख चीख
इसका मातम मनाते हैं ,

बड़ी स्वार्थी है यह दुनिया..!

मातम मृतक का नहीं..
खुद का मनाते हैं लोग !


मौत दर्द नहीं है
कोई पीड़ा भी नहीं है ..


एक सन्नाटा है मौत,
बस जोरदार सन्नाटा..


जो धीरे से उतरता है
और पसर जाता है !!


– रंजन कुमार 

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Ranjan Kumar
Founder and CEO of AR Group Of Institutions. Editor – in – Chief of Pallav Sahitya Prasar Kendra and AR Web News Portal.Motivational Speaker & Healing Counsellor ( Saved more than 120 lives, who lost their faith in life after a suicide attempt ).Author, Poet, Editor & freelance writer. Published Books :a ) Anugunj – Sanklit Pratinidhi Kavitayenb ) Ek Aasmaan Mera BhiHaving depth knowledge of the Indian Constitution and Indian Democracy.For his passion, present research work continued on Re-birth & Regression therapy ( Punar-Janam ki jatil Sankalpanayen aur Manovigyan ).Passionate Astrologer – limited Work but famous for accurate predictions.
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