मोहब्बत और फिक्र का एक अंदाज यह भी तो है

दिल मे आता है पूछ लूं
इन उदास आँखों मे
तैरती , पसरी सी
और लबों पर
दशकों से बिखरी
खामोशियों का सबब,
लेकिन डरता हूँ
मेरी ये हिमाकत
तेरी इस नैसर्गिक
सुंदरता को सदा के लिए
कहीं नष्ट न कर दे ..
हां तुम उदासी मे घिरी
सौंदर्य की एक जीवंत मूर्ति हो..
इसलिए अपलक
जब जी चाहे तुम्हे निहार लेता हूँ ,
मोहब्बत का,फिक्र की
एक यह भी तो अंदाज है
तुम्हे नैसर्गिक धारा मे
बहता छोड़ दूँ
और में भी सदा के लिए खामोश रहूं !!


– रंजन कुमार

Ranjan Kumar
Ranjan Kumar

Founder and CEO of AR Group Of Institutions. Editor – in – Chief of Pallav Sahitya Prasar Kendra and AR Web News Portal.

Motivational Speaker & Healing Counsellor ( Saved more than 120 lives, who lost their faith in life after a suicide attempt ).

Author, Poet, Editor & freelance writer. Published Books :

a ) Anugunj – Sanklit Pratinidhi Kavitayen

b ) Ek Aasmaan Mera Bhi

Having depth knowledge of the Indian Constitution and Indian Democracy.

For his passion, present research work continued on Re-birth & Regression therapy ( Punar-Janam ki jatil Sankalpanayen aur Manovigyan ).

Passionate Astrologer – limited Work but famous for accurate predictions.

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