इस दौर में तो चापलूसी ही सर्वोत्तम नीति है..

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chaplusi

कई बैकों के एक्जाम दिए, कठिन – कठिन, सेलेक्ट भी हुए पर ज्वाइन नही किये कभी ..

अच्छा ही किये थे यार .. अब मालूम पड़ा सही रास्ता, थैंक्यू उर्जित पटेल दादा,आप इस्तीफा नही देते तो शक्तिकांत दद्दा नही चुनाते और ये नही चुनाते तो इस गूढ़ ज्ञान से महरूम ही रह जाते फिर ..
 
थोड़ी चापलूसी कर के तो रिजर्व बैंक का गवर्नर भी बना जा सकता है,कोई योग्यता नही,कोई एक्जाम नही,कोई इंटरवियू नही .. सीधे गवर्नर .. सोचने में लगे हैं शक्तिकांत दास के रिटायर होने तक मैं कोशिश में लगूँ क्या अभी से ..? 
 
ये इतिहास से एमए हैं तो मैं राजनीति शास्त्र और हिंदी से .. पहले मालूम होता गवर्नर की योग्यता के लिए अर्थशास्त्र जरूरी नही तो क्या पता .. हम भी हो सकते थे दास बाबू की जगह ..
 
अब केवल चापलूसी करेंगे भाई, मंत्री जी के अर्थशास्त्र पर प्रश्न चिन्ह नही उठाऊंगा, चापलूसी अभी से शुरू मितरों .. मुझको अब गवर्नर ही बनना है सीधे .. कोशिश करने में क्या हर्ज है .. आप चाहें तो अग्रिम बधाई देके मेरी चापलूसी भी शुरू कर सकते हैं .. देश ऐसे ही चलता है भाई, मैं किसी और का चापलूस बनूँ कोई मेरा चापलूस बने कोई मेरे चापलूस का चापलूस बने .. सिद्धांत यही है आज का .. चापलूसी ही सर्वोत्तम नीति है ..!
 
दिसम्बर आ गया कि नही ..?? होली अब नजदीक ही है .. दास बाबू को बुरा न लग जाए भाई, अब उनके हस्ताक्षरित नोट जेब मे लेके घूमेंगे .. इसलिए यह जुमला उवाच ही देते हैं अभी साथ ही साथ .. बुरा न मानो होली नियरे है ..!!
 
– रंजन कुमार