Hindi poetry : गुनाहों की उनके फेहरिस्त – Ranjan Kumar

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match burn out

एक तो गुनाहों की उनके 
फेहरिस्त 
पहले ही बहुत लम्बी है ,

हर रोज जान बूझकर 

नए गुनाह वह 
अब भी किये जाते हैं !


इल्म नहीं यह क्यों आखिर
जिस दिन क़यामत बरपेगी
कौन उन्हें बचाएगा ?


घड़ा पापों का जब फूटेगा
किसको आवाज लगायेंगे
कश्ती  कौन पार लगाएगा ?


– रंजन कुमार