Hindi poem : एक कश्ती हूँ मैं – Ranjan Kumar

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Ranjan Kumar Hindi Poetry
दरिया मे तैरती डूबती 
उतराती सी 
एक कश्ती हूँ मैं ,
लहरों के थपेड़ों से 
डरकर नहीं पूछती 
अंजाम कभी !!

इसे मेरा हौसला 

कहती है ये 
बहती हुई नदी अक्सर ,
और किनारों को 
लगता है लहरो के संग 
दुस्साहस है !!

मुझे सफर की 

ललक है और 
सफर जारी है अनवरत ,
जब रुकेंगे तो 

होगा हिसाब 
कितनी दूर चली आई थी !!

– रंजन कुमार