ये दौर और सत्य – रंजन कुमार

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ये दौर और सत्य
बस सच की तलब थी,
न्याय मेरी आंखों में बोलता था,
और रोना नहीं आया कभी,
तो मैं यूँ ही उनके द्वारा
एक खिलौना बना लिया गया !
वो रोने का हुनर जानता है
और साथ ही झूठ बोलना भी,
इसलिए वह सफल खिलाड़ी
समझे बैठा है खुद को..
हर फन में माहिर बता बता के . !
ये संक्रमण का दौर है पगले,
खेल खत्म होगा एक दिन,
रोना धोना उस दिन
किसी काम न आएगा,
और सत्य तुझे तेरा नंगापन
सरेयाम दिखाएगा ..!