Hindi poetry on father’s day : तुम्हारा अवशेष मुझमे जी रहा है शिद्दत से – Ranjan Kumar

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magic girl
ओ पिता तर्पण तुम्हें..
चिर विश्राम करो तुम,,
परमात्मा की गोद में,

तुम शेष नहीं दुनिया में,
मगर तुम्हारा अवशेष
मुझमे जी रहा है …
शिद्दत से !

खुद को देखता हूँ
आईने में,
और सोचता हूँ..
 
मैं ऐसा हूँ ..
तो तुम कैसे रहे होंगे ?
होश होने पर..
मैंने तुम्हें नही देखा..!

जहाँ भी है रूह तेरी,
फादर्स डे पर आज,
वहाँ तक मेरा नमन पहुँचे..!

– रंजन कुमार