Hindi poetry : सिर्फ अंधेरों की ही पहचान यहाँ पुख्ता है – Ranjan Kumar

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उजाला बाँटता सूरज 
अँधेरे में भी 
डूब सकता है यूँ ही ,

अचानक ,

हैरान मत होना !

ये दौर ऐसा है
की सिर्फ अंधेरों की ही
पहचान यहाँ पुख्ता है,


और हर प्रकाश की मीनारें
शक के दायरे में !!


– रंजन कुमार