मुंदती हुयी आँखों के चारो ओर सिमटती हुयी दुनिया

army cap

मुंदती हुयी आँखों के चारो ओर
सिमटती हुयी दुनिया,
और बुझता हुआ  ,
जिन्दगी का चिराग !

कह देना सितारों से
आकर ले जाएँ ,
कुछ अनकहे से शब्द सन्देश,
मेरे उन सब अपनों के लिए ,
जिनकी आशाओ का केंद्र था मै ,
शहादत से पहले तक !

सरहद थी सामने ,
निगाहों में जुनून था,
और माँ भारती से किया
वह वादा भी ,
जिसे पूरा करते करते ,
कुछ वादे अधूरे छोड़े जा रहा हूँ …

मुन्नू की सायकिल का ,
बाबू की आँखों के इलाज का ,
अम्मा की मन्नत पूरी करवाने का ,
और तुझसे किया वादा भी ….
फिर मिलने का ….!

आयेंगे मेरी शहादत पर
अपनी रोटी सेंकने
कुछ सियासतदान, कुछ हुक्मरान ,
कह देना उनसे ,
मै कायर नहीं था
उन सबकी तरह ,
जो कर सकता था कर गया !

आंसू मत बहाना मेरी खातिर ,
अंगारे पैदा करना
उन आसूंओं के एवज में ,
और देना सीख
अपने मुन्नू को ,
मै तो लड़ मरा सरहद पर,
दुश्मनों से ..

उसे लड़ना है घर के अंदर
छुपे उन शैतानो से,
जिन्होंने दलाली खायी ,
सैन्य सामानों की खरीद में ..

और मैंने खाई गोली ,
उनकी दलाली के एवज में ,
मेरी शहादत तभी सफल होगी ,
जब उखड जायेगा तम्बू ,देश के दलालों का !

मुंदती हुयी आँखों के चारो ओर
सिमटती हुयी दुनिया
और बुझता हुया
जिन्दगी का चिराग !

कह देना सितारों से
आकर ले जाएँ ,
कुछ अनकहे से शब्द सन्देश,
मेरे उन सब अपनों के लिए ,
जिनकी आशाओ का केंद्र था मै,
शहादत से पहले तक !!

– रंजन कुमार 

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