Poetry on Love: बेशुमार इश्क तुम्हें अब भी है मुझसे !

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dew drops on leaves

सुबह सुबह
ओस की बूंदों पर
अब भी मै
कभी कभी ,
नंगे पाँव चलता हूँ ..!

महसूसता हूँ तुम्हें ..

तुम कहती थी ,
इससे ..
आँखों की रौशनी
खूब बढ़ती है ..!

देखकर बताओ मीत ..
मेरी आँखों में ,

अब भी वही नूर
बाकी है या नहीं ..
जो तुमने भरे थे सब ..!

सच के रंग

और न्याय की प्यास ..
प्रकृति का उल्लास
और करुणा की बूंदें .
सब सहेज कर रखा है,
अभी तक मैंने ..!

तुम तो देख सकती हो

अब हजार आँखों से ,
कण कण से,
तेरी खुश्बू से महमहाती
यादों की बगिया
अभी तक है मेरी ..!
थाम लेना हाथ ,

जो लडखडाऊँ कभी ..
चलना संग हरदम
बनके अहसास मेरा ..
मोहब्बत बिखेरे रखना
हर जगह अपनी ..!

तुम अहसास हो ,

जीवन में जीवन का ..
उल्लास हो,आभास हो,
साँसों के उपवन का ..
गीत हो सरगम हो
मधुमास हो जीवन का ..!

गीत में , संगीत में ,

और गहन प्रीत में
हर जगह तुम समाये हो !
कह जाते हो अब भी,
बेशुमार इश्क तो तुम्हें
अब भी है मुझसे !!

– रंजन कुमार