Love poem : उसके प्यार का वह फ़साना मैं आजतक कहाँ भूला – Ranjan Kumar

me and she

अब उसे कुछ भी तो 
जब याद नहीं 
वो बिसरी बातें ,

सोचता हूँ 
क्या और क्योंकर 
याद भी दिलाऊं मैं ! 

चाँद के पहरे में 
पहरों सितारों से 
करना मेरी बातें ,

लिखकर मेरा नाम 
अपनी हथेली पर 
मुझको दिखलाना ,

रेत पर लिख लिख कर 
वो पैगाम मिटाना ,

उसके प्यार का 
वह फ़साना 
मैं आजतक कहाँ भूला ?

पार स्मृतिओं के 
देह की दुनिया से परे 
मिलेंगे जब तो बताऊंगा ,

जिन्दगी 
बेनूर कटी कितनी 
उससे बिछड़ जाने पर !

रूह की संवाद बस 
रूह से ही हो जाती ,

तो जिन्दगी 
फिर कब की ही 
मुकम्मल  थी !!

– रंजन कुमार

Ranjan Kumar
Ranjan Kumar

Founder and CEO of AR Group Of Institutions. Editor – in – Chief of Pallav Sahitya Prasar Kendra and AR Web News Portal.

Motivational Speaker & Healing Counsellor ( Saved more than 120 lives, who lost their faith in life after a suicide attempt ).

Author, Poet, Editor & freelance writer. Published Books :

a ) Anugunj – Sanklit Pratinidhi Kavitayen

b ) Ek Aasmaan Mera Bhi

Having depth knowledge of the Indian Constitution and Indian Democracy.

For his passion, present research work continued on Re-birth & Regression therapy ( Punar-Janam ki jatil Sankalpanayen aur Manovigyan ).

Passionate Astrologer – limited Work but famous for accurate predictions.

Articles: 300