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Saturday, September 26, 2020
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Jeevan mein itna sanghars kyun hai

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Jo bhi kaam mila karti rahi. Humesha mein ek madhyam bani dusuro ke sahayata ke liye. Apna kabhi nahin socha. Apni behen ko leke humesha pareshan reheti hun. Bussiness mein bahut kathin paristhiti se gujar rahi hun. Mere upar bahut dayitwa hai.keise karungi pura.

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जीवन में दिन रात की तरह से सुख दुःख आते रहते हैं,दुःख न हो तो सुख की कीमत ही हमे न समझ आये,,प्यास की तड़प का अहसास न हो तो पानी पीने की तृप्ति का अहसास और संतुष्टि क्या होती है यह कैसे समझा जा सकता है भला ..?? हारना नहीं है क्योंकि हर रात का यह सन्देश होता है कि सुबह अब बहुत दूर नहीं …जितना घना अन्धेरा हो जितनी सुनसान रात हो वह इशारा है की सूर्य जल्दी चमकेगा ! हर दायित्व को इश्वर की शरणागति लेकर पूरा करें दृढ़ता के साथ ..उम्मीद बनाए रखना है कि …सब अच्छा होगा ..हम जो सोचने लगते हैं विचारों में वह होने लगता है यह स्वामी विवेकानंद जी कहते है!

इसलिए आपको ..यह नहीं सोचना की बहुत दुःख है ..सोच की प्रक्रिया बदलें ..यह सोचिये विचारों में अपने की सुख के पल भी अब आयेंगे ,,दुनिया में सबके दिन बदलते हैं तो मेरे भी बदलेंगे ही और मै खुद बदल सकती हूँ यह संकल्प लीजिये ..संकल्प के साथ ही उसी पल से सकारात्मकता आपके जीवन में भरना शुरू ..और प्रकाश जलते ही अन्धेरा खत्म .!प्रयास करिये और परिवर्तन देखिये …

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