Hindi Poetry Love Poem : ये प्यार मोहब्बत धोखा है, इस धोखे से मैं डरता हूँ – Ranjan Kumar

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ये प्यार मोहब्बत धोखा है,
इस धोखे से मैं डरता हूँ !
 
सच कहूँ ,
इसी उलझन के कारण 
दूर ही अक्सर रहता हूँ !!
 
नहीं चाहता बनना टिशु पेपर 
उपयोग करो और निपटा दो !
 
कुछ देर साथ लोगे दोगे,
फिर चलना होगा तो तन्हा ही !
 
तुम आगे कदम बढ़ाते हो ,
मैं कशमकश से गुजरता हूँ !!
 
ये प्यार मोहब्बत धोखा है,
इस धोखे से मैं डरता हूँ !
 
सच कहूँ ,
इसी उलझन के कारण 
दूर ही अक्सर रहता हूँ !!
 
बहुत देखे दिलवाले जग में ,
फरेबी हैं सब,झूठे वादे करते हैं !
 
मतलब की खातिर नेह लगाते ,
जरुरतें, पूरी होते ही मुकरते हैं  !
 
कसमे साथ की देते हो जब ,
तन्हाई से फिर गुजरता हूँ !!
 
ये प्यार मोहब्बत धोखा है,
इस धोखे से मैं डरता हूँ !
 
सच कहूँ ,
इसी उलझन के कारण 
दूर ही अक्सर रहता हूँ !!
 
शीशा दिल,फिर फिर टूटेगा मेरा 
अब प्रेम की पींगे रहने दो !
 
दिल की धड़कन कहती क्या है ,
मत सुनो मुझी तक रहने दो !
 
तुम मिल जाओ कहीं न राहों में 
घबरा के घर से  निकलता हूँ !!
 
ये प्यार मोहब्बत धोखा है,
इस धोखे से मैं डरता हूँ !
 
सच कहूँ ,
इसी उलझन के कारण 
दूर ही अक्सर रहता हूँ !!
 
– रंजन कुमार 
Ranjan Kumar
Ranjan Kumar

Founder and CEO of AR Group Of Institutions. Editor – in – Chief of Pallav Sahitya Prasar Kendra and AR Web News Portal.

Motivational Speaker & Healing Counsellor ( Saved more than 120 lives, who lost their faith in life after a suicide attempt ).

Author, Poet, Editor & freelance writer. Published Books :

a ) Anugunj – Sanklit Pratinidhi Kavitayen

b ) Ek Aasmaan Mera Bhi

Having depth knowledge of the Indian Constitution and Indian Democracy.

For his passion, present research work continued on Re-birth & Regression therapy ( Punar-Janam ki jatil Sankalpanayen aur Manovigyan ).

Passionate Astrologer – limited Work but famous for accurate predictions.

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