Hindi Poetry : ख़ुशी औ गम में जहां महसूस न हो फ़र्क !

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ख़ुशी-औ-ग़म में जहां,
महसूस न हो फर्क,
वो जिंदगी है की,
कुछ और है साक़ी??..

की हमसफ़र से..साथ की चाहत,

उस हमनवा से फासला भी बेहद,
क्यों कुछ उम्मीद भी इतनी..
ना-उम्मीद है साक़ी?

की तेरे लौट आने की मिन्नतें,

दरगाह-हर-दरगाह..
की तेरे न लौटने का सितम,
भी कितना अजीब है साक़ी!

की ये चाँद भी आसमां

का कोई सेहबा है,
या खामोश बैठा
आफताब है साक़ी ?

की तेरी ही सूरत हर

चेहरा-दर-चेहरा,
तेरी दुआ है या करीब,
करीब कुर्बत है साक़ी??..

– Vvk