सफ़र वह अलहदा ही होता है

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जब रास्ते रास्तों से ही 
सब सवाल करें ,
और मुसाफिर 
बेपरवाह हो गुजर जाये !

सफ़र वह अलहदा ही होता है,

राह चलती है ,
मंजिलें क़दमों में बिछी जाती हैं,
मुसाफिर बहुत दूर,
बहुत आगे निकल जाता है !!